शहर और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। शीतलहर के बीच भी कुछ निजी विद्यालय खुले होने के कारण बच्चों और अभिभावकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार ने ठंड के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए 1 जनवरी से 15 जनवरी तक सभी सरकारी और निजी विद्यालयों को बंद रखने के आदेश दिए थे। हालांकि, मोटाहल्दू और बेरीपड़ाव जैसे क्षेत्रों में कुछ निजी विद्यालयों द्वारा इन आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है।
अभिभावकों ने जताई नाराजगी
नाम न छापने की शर्त पर कुछ अभिभावकों ने बताया कि कड़ाके की ठंड में बच्चों को स्कूल भेजना बेहद मुश्किल हो गया है। “शीतलहर के बीच बच्चों को सुबह स्कूल भेजना न केवल स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण है, बल्कि उनकी पढ़ाई पर भी बुरा असर डाल रहा है,” एक अभिभावक ने कहा।
प्रशासन का रुख सख्त
मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद जायसवाल ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ठंड के मद्देनज़र सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। इसके बावजूद अगर कोई निजी विद्यालय खुले पाए गए, तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा, “हमने सभी स्कूल संचालकों को निर्देश दिए हैं कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। आदेश का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”
बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता
प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि कोई विद्यालय खुले होने की सूचना मिले, तो तुरंत इसकी जानकारी शिक्षा विभाग को दें। बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ठंड के मौसम में सभी को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
