1 अप्रैल 2025 से बड़ा बदलाव! 15 साल पुराने वाहन रखना भी गैरकानूनी, वरना होगी सख्त कार्रवाई!

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अगर आपके पास 15 साल से अधिक पुराना वाहन है और आपने उसका रजिस्ट्रेशन रिन्यू नहीं कराया, तो अब उसे घर में रखना भी गैरकानूनी होगा। नई वाहन स्क्रैपिंग नीति के तहत, ऐसे वाहनों को 180 दिनों के भीतर अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्रों पर जमा करना अनिवार्य होगा। अनदेखी करने पर भारी जुर्माना, रजिस्ट्रेशन रद्द और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

 

क्या कहता है नया स्क्रैपिंग नियम?

  • 1 अप्रैल 2025 से नया वाहन स्क्रैपिंग नियम पूरे देश में लागू होगा।
  • 15 साल पुराने निजी वाहन और 20 साल पुराने गैर-परिवहन वाहन अनिवार्य रूप से स्क्रैपिंग के लिए भेजने होंगे।
  • वाहन निर्माताओं को भी हर साल एक निश्चित संख्या में वाहनों की स्क्रैपिंग का प्रमाण देना होगा, तभी उन्हें नए वाहन निर्माण की अनुमति मिलेगी।
  • कृषि कार्य में लगे वाहनों को इन नियमों से छूट दी गई है।
  • दिल्ली-एनसीआर में पहले से लागू सख्ती
  • दिल्ली-एनसीआर में पहले से ही 15 साल से पुराने पेट्रोल और 10 साल से पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगा हुआ है।
  • अन्य राज्यों में 15 साल से अधिक पुराने वाहन अगर फिटनेस टेस्ट पास कर लेते हैं, तो उनका रजिस्ट्रेशन हर 5 साल में नवीनीकरण किया जा सकता है।

क्यों जरूरी है यह नया नियम?

इस नीति का उद्देश्य पुराने वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करना है। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, पुराने वाहनों को समय पर स्क्रैप करने से प्रदूषण में भारी गिरावट आएगी और नए वाहनों की तकनीक को बढ़ावा मिलेगा।

 

क्या होगा अगर आप नियम नहीं मानते?

  • 15 साल पुराना वाहन घर में रखना भी गैरकानूनी होगा।
  • ऐसा करने पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
  • वाहन रजिस्टर्ड स्क्रैपिंग सेंटर में जमा न करने पर जब्त भी किया जा सकता है।

स्क्रैपिंग में क्या होगा?

  • पुराने वाहनों से स्टील और अन्य धातुएं रिसाइकिल की जाएंगी ताकि नए वाहन बनाने में इस्तेमाल हो सकें।
  • स्क्रैपिंग के लिए वाहन में मौजूद स्टील की मात्रा के आधार पर मानक तय किए गए हैं।

आपको क्या करना चाहिए?

अगर आपके पास 15 साल से पुराना वाहन है, तो 180 दिनों के भीतर उसे स्क्रैपिंग सेंटर में जमा कर दें या फिटनेस टेस्ट पास करवाकर उसका रजिस्ट्रेशन रिन्यू कराएं।

 

➡ यह नियम सिर्फ नियमों की सख्ती के लिए नहीं, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण और नए तकनीकी वाहनों को बढ़ावा देने के लिए लाया गया है।

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