उत्तराखंड में बाघ के हमले से शांति देवी (48) की मौत के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ आक्रोश जताते हुए वन आरक्षी जसवंत रावत को पीट दिया। घटना मंगलवार शाम ओखलदुंगा की है, जब शांति देवी जंगल से चारा लेकर लौट रही थीं। बाघ ने उन पर हमला कर उन्हें जंगल में घसीट लिया, जिससे उनकी मौत हो गई।
ग्रामीणों का प्रदर्शन
बुधवार सुबह शव मिलने के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग की लापरवाही पर नाराजगी जताई और एसडीएम प्रमोद कुमार और रेंजर रमेश ध्यानी को घेर लिया। ग्रामीणों का कहना था कि बाघ की उपस्थिति की जानकारी पहले ही दी गई थी, लेकिन विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
वन आरक्षी पर हमला
घटना स्थल पर पहुंचे वन आरक्षी जसवंत रावत को ग्रामीणों ने पीट दिया। उनकी शिकायत थी कि विभाग ने खानापूर्ति के लिए ही पिंजरा लगाया, जोकि बंद पाया गया। वनकर्मी के साथियों ने किसी तरह उन्हें बचाया।
वन विभाग का पक्ष
डीएफओ दिगांथ नायक ने कहा कि पिंजरा किसी जानवर के मूवमेंट के चलते बंद हुआ होगा और विभाग ने इसे बंद नहीं किया। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वनकर्मियों के साथ सहयोग करें। बाघ को पकड़ने के लिए दो पिंजरे और छह ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं।
मुआवजा और आश्वासन
ग्रामीणों ने शांति देवी के परिवार को मुआवजा और नौकरी की मांग की है। विभाग ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही बाघ को पकड़ लिया जाएगा और भविष्य में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।
