24 साल का इंतजार, अब होगा इंसाफ? पत्रकारों के हक पर CM धामी का बड़ा बयान!

खबर शेयर करें -

 

देहरादून: उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उनके देहरादून स्थित आवास पर मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि पृथक उत्तराखंड राज्य निर्माण में पत्रकारों और अखबारों की अग्रणी एवं निर्णायक भूमिका रही है, जिसे अब तक उचित सम्मान नहीं मिला है।

पत्रकारों ने बताया कि अलग राज्य आंदोलन में पत्रकारों का योगदान किसी भी दृष्टि से राज्य आंदोलनकारी ताकतों और राजनीतिक दलों से कमतर नहीं था। उन्होंने अपनी लेखनी से आंदोलन को न केवल व्यापक विस्तार दिया, बल्कि वैचारिक एवं बौद्धिक आधार भी प्रदान किया। शोधपूर्ण और तर्कसंगत तथ्यों के माध्यम से पृथक राज्य की आवश्यकता को प्रमाणित किया और निर्णायक दिशा दी।

उन्होंने मुख्यमंत्री को यह भी याद दिलाया कि 2002 में उत्तराखंड की पहली निर्वाचित सरकार और संपूर्ण विपक्ष ने राज्य गठन में पत्रकारों के योगदान की सराहना की थी। हालांकि, इसके बावजूद इन पत्रकारों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। राज्य निर्माण में योगदान देने वाले श्रमजीवी पत्रकारों को पहले प्राप्त सुविधाओं एवं सम्मान से भी वंचित होना पड़ा है।

यूनियन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि ऐसे पत्रकारों की पहचान के लिए सुस्पष्ट और पारदर्शी मानक तय किए जाएं। वरिष्ठतम पत्रकारों की एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर योग्य पत्रकारों को “विशिष्ट राज्य आंदोलनकारी” घोषित किया जाए और उन्हें उचित सम्मान एवं सुविधाएं प्रदान की जाएं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की गंभीरता को स्वीकारते हुए कहा कि वह एक जांच कमेटी बनाकर उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महती भूमिका निभाने वाले पत्रकारों की पहचान करेंगे और उचित निर्णय लेंगे।

इस अवसर पर उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के अध्यक्ष अरुण शर्मा, महामंत्री प्रयाग पांडे, कार्यवाहक अध्यक्ष अविक्षित रमन, डॉ. रजनीकांत शुक्ला, संयोजक गणेश पाठक, डॉ. विपिन चंद्रा, ओपी पांडे, राष्ट्रीय पार्षद बीसी भट्ट, प्रभात ध्यानी, संजय आर्य, अमित गुप्ता, रमेश चंद्रा और हरीश सैनी सहित कई वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित रहे।

Breaking News