महाकुंभ में बड़ा हादसा टला! बस कर्मियों और पुलिस की सटीक कार्रवाई से चार युवतियों की जान बची

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महाकुंभ स्नान के लिए दून से प्रयागराज गई चार युवतियों की जान उत्तराखंड परिवहन निगम के बस स्टाफ और उत्तर प्रदेश पुलिस की मुस्तैदी के चलते सुरक्षित बच गई। युवतियों को बस पकड़ने के लिए बुक की गई रैपिडो बाइक चालकों ने संदिग्ध स्थान की ओर ले जाने का प्रयास किया, लेकिन बस परिचालक और चालक की सतर्कता से समय रहते उन्हें बचा लिया गया।

 

कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम?

शनिवार शाम देहरादून से प्रयागराज के लिए रवाना हुई वोल्वो बस (यूके07-पीए-4395) रविवार सुबह बेला कछार बस अड्डे पर पहुंची। वापसी में शाम 5 बजे बस को देहरादून के लिए रवाना होना था। सभी 44 सीटें बुक थीं, लेकिन 40 यात्री समय पर आ गए, जबकि चार युवतियां लापता थीं।

 

परिचालक हेमराज की सतर्कता बनी वरदान

बस परिचालक हेमराज ने बुकिंग चार्ट चेक किया और देखा कि चारों लापता यात्री युवतियां थीं। पहले उन्होंने आधे घंटे इंतजार किया, फिर स्टेशन प्रभारी अजित कुमार को सूचना दी।

युवतियों को फोन करने पर उन्होंने बताया कि वे रैपिडो बाइक से बस अड्डे आ रही हैं। लेकिन एक घंटे तक भी वे नहीं पहुंचीं। जब परिचालक ने दोबारा संपर्क किया, तो घबराई हुई आवाज में युवती ने बताया कि बाइक सवार संदिग्ध स्थान की ओर ले जा रहे हैं और बाइक रोक नहीं रहे।

 

बस चालक-परिचालक की सूझबूझ ने बचाई जान

युवती की आवाज सुनते ही हेमराज और बस चालक कपिल यादव ने बिना देरी किए पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी और युवतियों के मोबाइल नंबर साझा किए। पुलिस ने सर्विलांस के जरिए युवतियों की लोकेशन ट्रैक कर उन्हें सुरक्षित बचा लिया और दोनों बाइक सवारों को हिरासत में ले लिया।

इस बीच बस यात्रियों को जब इस घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने आरोपित बाइक सवारों की पिटाई कर दी।

 

बस स्टाफ होगा सम्मानित

परिवहन निगम के स्टेशन अधीक्षक अजित कुमार ने बताया कि बस स्टाफ की सतर्कता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते एक बड़ी अनहोनी टल गई। बस चालक और परिचालक को इस बहादुरी के लिए सम्मानित किया जाएगा।

 

चार घंटे देर से चली बस, यात्रियों का हंगामा भी शांत हुआ

बस के नियत समय पर न चलने से कुछ यात्रियों ने हंगामा किया। लेकिन जब उन्हें युवतियों के संकट की जानकारी मिली, तो उन्होंने भी युवतियों की सलामती की दुआ की। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया के कारण बस को करीब चार घंटे देरी से रात 8:45 बजे देहरादून के लिए रवाना किया गया।

निष्कर्ष

बस स्टाफ और पुलिस की तत्परता ने चार युवतियों को किसी बड़ी अनहोनी का शिकार होने से बचा लिया। यह घटना सतर्कता और त्वरित निर्णय लेने की महत्ता को दर्शाती है। उत्तराखंड परिवहन निगम के कर्मचारियों की इस बहादुरी को सराहना मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य में भी ऐसी मुस्तैदी देखने को मिले।

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