इस रहस्यमयी घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है, लेकिन अभी तक इस रहस्य की गुत्थी सुलझी नहीं है। क्या यह सच में आत्महत्या थी, या इसके पीछे छुपा है कोई गहरा राज?
राजस्थान के मेंहदीपुर बालाजी में दर्शन करने गए देहरादून के एक परिवार की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरेंद्र कुमार उपाध्याय, उनकी पत्नी कमलेश, पुत्री नीलम और पुत्र नितिन के शव धर्मशाला के कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में मिले।
रहस्यमयी हालात:
धर्मशाला के कमरे में चारों के शव मिलने पर पुलिस इसे सामूहिक आत्महत्या मान रही है, लेकिन कुछ सवाल ऐसे हैं जो इसे महज आत्महत्या से अधिक कुछ और दर्शाते हैं। शवों के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, जिससे यह शक गहरा हो गया है कि कहीं यह सोची-समझी साजिश तो नहीं।
जहरखुरानी गिरोह पर शक:
घटनास्थल पर कुछ शवों के मुंह से झाग निकलते पाए गए, जो जहर के सेवन की ओर इशारा करता है। क्या परिवार जहरखुरानी गिरोह का शिकार हुआ, या किसी ने जानबूझकर उन्हें मौत के घाट उतारा?
रहस्य और जांच:
मामला इसलिए भी पेचीदा हो गया है क्योंकि परिवार चार दिन पहले ही देहरादून से निकला था और नितिन उपाध्याय ने धर्मशाला का कमरा अपने नाम पर बुक किया था। यह भी ध्यान देने योग्य है कि नीलम, जो शादीशुदा थी, अपने मायके में रह रही थी। क्या यह पारिवारिक कलह का नतीजा है, या किसी बाहरी व्यक्ति ने इसका फायदा उठाया?
कहानी में ट्विस्ट:
स्थानीय लोगों और पुलिस को शक है कि यह मामला आत्महत्या से अधिक हो सकता है। घटनास्थल पर कोई संघर्ष के निशान नहीं मिले, लेकिन शवों की स्थिति और संदिग्ध हालात ने इसे एक सस्पेंस से भरपूर केस बना दिया है।
