लालकुआं। उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराओं से जुड़ा लोकपर्व ‘सातो-आठो’ लालकुआं क्षेत्र में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। पर्व के आगमन से क्षेत्र का माहौल भक्तिमय हो गया है। मायके आईं मां गौरा के स्वागत की परंपरा के तहत महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की।

पर्व के शुभारंभ पर पंचमी तिथि को सुहागिन महिलाओं ने सात प्रकार के अनाज (बिरूड़) भिगोकर रखे। इसके बाद ब्रह्ममुहूर्त में महिलाएं फलाहारी मंदिर पहुंचीं, जहां परंपरानुसार बिरूड़ को धोकर पूजा-अर्चना की गई। डोर, दुबड़ा सहित मंदिर की विभिन्न रस्में भी श्रद्धापूर्वक संपन्न की गईं।
इसके पश्चात नगर पंचायत सभासद दीप्ति पांडे के निवास पर गौरा और महेश्वर की सुंदर प्रतिमाएं तैयार कर पूजा-अर्चना की गई। पुरोहित पंडित भास्कर पाठक ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई। महिलाओं ने गौरा-महेश्वर का पूजन कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की। महिलाओं ने हाथों में डोर धारण की तथा गले में दुबड़ा धारण कर पर्व की परंपराओं का निर्वहन किया।
पूजन के बाद महिलाओं ने पारंपरिक मांगलिक गीत गाए और लोकनृत्य प्रस्तुत कर पर्व की खुशियां मनाईं। महिलाओं ने एक-दूसरे को सातो-आठो की शुभकामनाएं देते हुए उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
लोकमान्यता के अनुसार सातो-आठो पर्व मां गौरा के मायके आने और भगवान महेश्वर के साथ उनके मिलन से जुड़ा है। सात प्रकार के अनाजों का पूजन कृषि समृद्धि, अन्न-धन की खुशहाली और परिवार की सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व महिलाओं की आस्था के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत करता है।
इस अवसर पर सभासद दीप्ति पांडे, गीता भट्ट, बबली भट्ट, नीमा पाण्डे, उमा मेर, रजनी, गीता मेहरा, शोभा जोशी, चन्द्रा कौर, दीपा पाण्डे, मीरा बोरा और रेखा यादव सहित बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।
